एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने आज कहा है कि छत्तीसगढ़ मे तथाकथित फर्जी मुठभेड़/न्यायेतर हत्याओं की जांच करने गयी एक नागरिक जांच समिति के उन सात सदस्यों को जिन्हें २५ दिसम्बर को गिरफ़्तार किया गया था, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए

छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुकमा जिले से तेलंगाना डेमोक्रेटिक फ्रंट (TDF) की एक तथ्यान्वेषी टीम के सात सदस्यों को २५ दिसंबर को गिरफ्तार करने का दावा किया है लेकिन स्वयं कार्यकर्ताओं ने और हैदराबाद में उनके सहयोगियों ने इस दावे को गलत ठहराते हुए यह आरोप लगाया है की इन सात कार्यकर्ताओं को २५ दिसंबर को सुबह 9.30 बजे तेलंगाना राज्य के दुम्मुगूडेंम (Dummugudem) गांव में तेलंगाना पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और फिर उसी दिन शाम 5.30 बजे छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया था

छत्तीसगढ़ पुलिस ने इन सात कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर 100,000 के मूल्य के प्रतिबंधित नोट रखने और माओवादी साहित्य के साथ पाये जाने के आधार पर अत्याधिक कठोर छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया है तेलंगाना के मानवाधिकार संगठनों ने इन आरोपों का खंडन किया है और अपने कार्यकर्ताओं पर झूठा आरोप लगाने का उल्टा आरोप पुलिस पर लगाया है। सभी सातों कार्यकर्ताओं को २६ दिसंबर को सुकमा जिले के मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था मजिस्ट्रेट ने जमानत देने से इनकार करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया अगर कार्यकर्ता इन आरोपों के अन्तर्गत दोषी पाये जाते हैं तो सात साल तक की जेल की सजा भुगत सकते हैं

गिरफ्तार किये गए सदस्यों में तीन वकील - बल्ला रविंद्रनाथ (Balla Ravindranath), छिक्कूदु प्रभाकर (Chikkudu Prabhakar), डी प्रभाकर (D Prabhakar), एक स्वतंत्र पत्रकार- दुर्गा प्रसाद (Durga Prasad), और उस्मानिया विश्वविद्यालय से तीन छत्र - नजीर (Nazeer), राजेन्द्र प्रसाद (Rajendra Prasad) और आर. लक्ष्मण (R. Lakshman)- शामिल हैं यह टीम छत्तीसगढ़ राज्य में सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर अंजाम दी गयी न्यायेतर हत्याओं की खबरों की जांच करने के लिए छत्तीसगढ़ जा रही थी

छत्तीसगढ़ सरकार तुरंत सभी सात लोगों को रिहा करे तथा कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को, जो अपने हक़ों के दायरे में मानवाधिकार हनन की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, उन्हें परेशान करने और डराने-धमकाने के किये कठोर कानूनों का दुरूपयोग करना बंद करे “, अभीर वी पी (Abhirr V P), कंपैनर, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा।

अधिकारियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि गिरफ्तार किये गए सात कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में अत्याचार नहीं किया जाए और निष्पक्ष सुनवाई के उनके अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

तेलंगाना डेमोक्रेटिक फ्रंट (TDF) कई हैदराबाद-स्थित गैर सरकारी संगठनों का समूह है जो न्यायेतर हत्याओं के मामलों पर बड़े पैमाने पर काम करते हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया से बात करते हुए, सिविल लिबर्टीज समिति के महासचिव, एन नारायण राव ने कहायह टीम छत्तीसगढ़ में फर्जी मुठभेड़ों के कई खबरों की जांच करने के लिए गयी थी वे २४ दिसंबर को हैदराबाद से निकले थे लेकिन इससे पहले कि वे छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर पाते, छत्तीसगढ़-तेलंगाना राज्य की सीमा के पास तेलंगाना पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उसके बाद उसी दिन छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया छत्तीसगढ़ पुलिस नागरिक संगठनों को राज्य में स्वतंत्र रूप से जांच करने नहीं दे रही है यह टीम एक तथ्यान्वेषी मिशन पर गयी ही और वे ऐसी कोई भी नकद राशि नहीं ले जा रहे थे जिसको बरामद करने का दावा पुलिस कर रही है

सुकमा जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया को बताया कि कार्यकर्ताओं को 100,000 के मूल्य के पुराने नोटों के साथ छत्तीसगढ़ सीमा के अंदर गिरफ्तार किया गया था उन्होंने यह भी दावा किया कि टीम के सदस्य माओवादी समर्थक हैं जो माओवादियों की पुराने नोटों से छुटकारा पाने में मदद कर रहे थे तेलंगाना पुलिस ने कहा है की इन गिरफ्तारियों मे उनका कोई हाथ नहीं है।

जिस तरह से सुरक्षा बलों और सशस्त्र माओवादि संगठनों के बीच संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और शोधकर्ताओं को चुप कराने के लिए लगातार कठोर कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, यह अत्यंत चिंताजनक हैअभीर वी पी (Abhirr V P) ने कहा।डराने-धमकाने के इस तरह के प्रयासों को आधिकारिक परंपरा नहीं बनाना चाहिए

पृष्ठभूमि

हाल ही में छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों पर न्यायेतर हत्याओं के कई आरोप सामने आने के बावजूद, राज्य सरकार की ओर से इन मामलों में स्वतंत्र आपराधिक जांच स्थापित करने की कोई पहल नहीं की गयी है

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर 2015 और सितंबर 2016 के बीच, राज्य पुलिस द्वारा सशस्त्र मुठभेड़ों की सूची में छत्तीसगढ़ राज्य सबसे ऊपर है। जिन २०६ मामलों में आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज़ की गयी हैं उनमें से ६६ मामले छत्तीसगढ़ राज्य के हैं

न्यायेतर हत्या का जो सब से हाल का मामला सामने आया है वह बीजापुर जिले में १६ दिसम्बर को घटित हुआ था एक 13 वर्षीय लड़के को एक कथित मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने मार डाला था। छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस ने कहा था कि जिला स्तरीय बल के एक संयुक्त दल ने एकअज्ञात और सशस्त्र वर्दीधारी माओवादीको एकसफल ऑपरेशनमें मार गिराया लेकिन उसके परिवार के सदस्यों ने पुलिस के विवरण को गलत बताते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने पुनः पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया था और उस पोस्टमार्टम के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।

छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम 2005 में माओवादी सशस्त्र समूहों द्वारा हिंसा का मुकाबला करने के लिए अधिनियमित किया गया था अधिनियम के कई हिस्से ऐसे हैं जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत भारत के दायित्वों का उल्लंघन करते है। अधिनियम के अन्तर्गतगैरकानूनी गतिविधिकी दी गयी परिभाषा अत्यंत व्यापक और अस्पष्ट है उदाहरण के तौर पर, ‘गैरकानूनी गतिविधिकी परिभाषा में शामिल किये गए हैं वह सभी कृत्य जोसार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव में दखल देते हैंया वह कृत्यजिनका मकसद हो आतंकित करना.. किसी भी सरकारी मुलाज़िम कोया वह कृत्य जो स्थापित कानून और उसके संस्थानों की अवज्ञा का प्रोत्साहन या प्रचारकरते हों मानवाधिकार रक्षकों की स्थिति पर रिपोर्ट करने वाले संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने इस कानून को निरस्त करने की मांग रखी है।

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