”मध्य प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिसकर्मियों द्वारा जनवरी में धार (मध्य प्रदेश) में चार आदिवासी महिलाओं के साथ कथित रूप से किये गए सामूहिक बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो”, ऐसा आज एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा। पुलिस द्वारा लूट-पाट के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।

२५ जनवरी को धर जिले के १३ पुलिस स्टेशनों के २०० से अधिक पुलिसकर्मियों ने हिल्बायदा और भूतिया के गांवों में छापे मारे, जिनका कथित उद्देश्य चोरी मामलों में संधिग्हदों को गिरफ्तार करना था। इन गांवों के अधिकतर निवासी भील आदिवासी समुदाय से हैं जिन्हें आधिकारिक तौर पर अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गई है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की एक तथ्यान्वेषी टीम के साथ फरवरी में इस क्षेत्र का दौरा किया। टीम को कई ग्रामवासियों ने बताया कि पुलिस ने उन पर जीवित गोला-बारूद और आंसू गैस दागी थी, जिसके बाद गांव के पुरुषों को गाँव छोड़कर भागना पड़ा। सामूहिक बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों के अलावा, महिलाओं ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उनके घरों में लूट-पाट की जिसमें उनके पैसे, पशु, कटी फसल और घर के बर्तन लूटे गए।

सेताबाई (नाम बदला गया है) ने कहा, “एक पुलिसकर्मी अंदर आया और उसने मेरे दो महीने के बेटे को जमीन पर गिरा दिया। हम दोनों बहुत रो रहे थे ... उन्होंने मेरी चांदी की चेन और सोयाबीन की बिक्री से मिले २०,००० रुपए छीन लिए। उसने मुझे नीचे धकेला और मेरे साथ बलात्कार किया।इस पुलिसकर्मी के बाद, एक और पुलिसकर्मी अंदर आया और उसने भी मेरे साथ बलात्कार किया। उन पुलिसकर्मियों ने मुझे धमकी दी और कहा कि अगर मैंने मुंह खोला तो वे मुझे गोली मार देंगे। वे शराब पी रहे थे। मैंने उनसे रो रो के यह कहते हुए विनती करी कि ऐसा मत करो। मुझे विश्वास नहीं हुआ कि वे पुलिस के लोग थे।”

सविताबाई (नाम बदला गया है) ने बताया, “उनमें से एक ने मेरे साथ बलात्कार किया और दूसरा बाहर खड़ा था। मैंने उन्हें बहुत मारा और चिल्लाई। लेकिन मेरी मदद करने के लिए कौन आता?... अगर उसने ऐसा किया तो उसे दंडित किया जाना चाहिए। क्या आपको लगता है कि मेरे साथ जो हुआ उसके बारे में मुझे अच्छा लगता है?”

एमनेस्टी इंडिया में महिलाओं के अधिकार संबंधी प्रचारक गोपीका बाशी ने कहा, “आदिवासी महिलाओं ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से पुलिस के शामिल होने का आरोप लगाया है, इसलिए सरकार की प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि एक निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाये।”

स्थानीय नेताओं के साथ समुदाय के सदस्यों ने छापे के दिन ही जिला पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन प्राथमिकी (एफआईर) अंततः ३० जनवरी को धार के एक विशेष अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गयी। इसमें वर्दीधारी पुलिस द्वारा चार महिलाओं के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न तथा लूटपाट का उल्लेख किया गया था। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, ३ फरवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच का आदेश दिया था जो १५ फरवरी को की गयी।

राज्य पुलिस ने आरोपों की जांच के लिए इंदौर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन किया है। धार जिले के पुलिस अधीक्षक ने आरोपों को गलत बताया है। “जांच दल में धार जिले के पुलिस कर्मि भी शामिल हैं, जिससे इस जांच दल की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिन्ह खड़े होते हैं।अधिकारियों को यह भी संज्ञान में लेना चाहिए कि आदिवासी समुदाय के साथ विभिन्न अधिकारियों द्वारा, जिनमें स्थानीय पुलिस के सदस्य भी शामिल हैं, अक्सर भेदभाव किया जाता है।एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने हमसे हुई एक बातचीत के दौरान यह कहा कि भील जनजाति के सभी सदस्य अपराधि हैं,” गोपीका बाशी ने कहा।

मध्यप्रदेश महिला मंच, एक महिला अधिकार समूह, ने जारी की गयी एक रिपोर्ट में इन घटनाओं और अधिकारियों की प्रतिक्रियाओं का ब्यौरा दिया है।रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारी टीम ने पाया कि अपने साथ हुई अत्यधिक हिंसा के इस प्रकरण के बाद यह महिलाएं एक-दूसरे के साथ मजबूती से खडी रहीं है, लेकिन एक गहन पितृसत्तात्मक समाज में यौन उत्पीडन के बारे में बोलना अभी भी एक शर्मनाक बात मानी जाती है। इसलिए वे छोटे समूहों में या बंद दरवाजों के पीछे इसके बारे में बोलती हैं लेकिन इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने में सक्षम नहीं हैं। इस अपराध की जांच कर रही टीमों को और अन्यथा गांव में स्थिति को समझने के लिए भी, समुदाय के भीतर सक्रिय पितृसत्तात्मक प्रणालियों को पहचानने की आवश्यकता है।”

”दोनों गांवों के आंकड़े इस समुदाय की अतिसंवेदनशील को दर्शाते है- यहां केवल २० प्रतिशत साक्षरता है और यहाँ बिजली के तारों का खिंचा जाना अभी भी बाकी है।

अधिकांश आबादी में परिवार के सदस्य, विभिन्न प्रकार के रोज़गार के लिए, क्षेत्र से बाहर पलायन करते हैं”, मध्यप्रदेश महिला मंच की सदस्य, शिवानी तनेजा ने कहा।